Thursday, 28 November 2013

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टीचर बनने का एक और मौका, करें आवेदन
उच्च शिक्षा में अध्यापकों के रिक्त पदों को भरने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने चालू पंचवर्षीय योजना में 5,000 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती किए जाने का फैसला लिया है।

यह शिक्षक राज्यों के विश्वविद्यालयों में खाली पड़े पदों पर तैनात किए जाएंगे। इन्हें शुरुआती वेतन 5.8 लाख रुपए सालाना राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान (रुसा) योजना के तहत दिया जाएगा। बाद के वर्षों में इन शिक्षकों की वेतन वृद्धि आदि मद में होने वाले खर्च संबंधित राज्यों को उठाने होंगे।

मानव संसाधन मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार उच्च शिक्षा में सुधार के लिए शिक्षकों की भर्ती पर रुसा योजना के तहत यह योजना बनाई गई है। इसमें वर्ष 2017 तक पांच हजार शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।

इस योजना के लिए सरकार ने कुल 99,000 करोड़ रुपए का बजट तय किया है। योजना के तहत सहायक प्रोफेसर अथवा समकक्ष शिक्षकों के खाली पड़े पदों पर ही भर्तियां की जाएंगी।

योजना के तहत भर्ती होने वाले शिक्षकों को साल में 5.8 लाख रुपए वेतन तय किया गया है। भविष्य में मंहगाई भत्ता व अन्य मदों में होने वाली वृद्धि का खर्च राज्य सरकारों को वहन करना होगा। सभी रिक्त पदों के लिए शिक्षकों की भर्ती यूजीसी द्वारा तय मानकों के अनुरूप ही की जाएगी।

योजना के तहत शिक्षकों की नियुक्ति का लाभ पाने के लिए राज्यों को लिखित रूप से यह स्वीकार करना होगा कि पांच से आठ साल बाद योजना की समाप्ति पर शिक्षकों के सारे खर्च एवं दायित्व राज्य सरकार उठायेगी। पिछले तीन सालों में जिन राज्यों में शिक्षकों के पदों पर भर्ती में ज्यादा जोर दिया गया है, उन्हीं राज्यों को इस योजना में भी प्राथमिकता दी जाएगी।

इस योजना में नए विश्वविद्यालयों को ही अधिक महत्व मिलेगा। इसके अलावा जहां पंद्रह या बीस छात्र पर एक शिक्षक तैनात हैं, ऐसे संस्थानों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। जिन राज्यों में छात्र शिक्षक अनुपात 20:1 से ज्यादा है, उन्हें योजना के तहत लाभ पाने के लिए वायदा करना होगा कि वे खाली पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति करके अनुपात को 20:1 से नीचे ले आएंगे।