पेंशनर्स को संशोधित पेंशन का लाभ जनवरी 2006 से मिलेगा
पेंशनर्स संस्था ने कहा- लंबे संघर्ष के बाद मिली जीत
भास्कर न्यूज त्न जालंधर
केंद्रीय पेंशनर्स को वर्ष 2006 से पहले रिटायर्ड मुलाजिमों को जनवरी 2006 से पैनशन संशोधन का वित्तीय लाभ मिलेगा। पेंशनर्स फ्रेंड ने भारतीय न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुरिंदर सिंह निज्जर व जस्टिस फाकिर मोहम्मद इब्राहिम कलिफुल्ला पर आधारित एक डबल बैंच ने 12 नवंबर 2013 को यूपीए सरकार को झटका देते हुए उसकी रिव्यू पिटीशन सिविल नंबर 2492/2013 व स्पेशल लीव पिटीशन नंबर 20355/2013 को सिरे से ही खारिज कर दिया है। इसका केंद्रीय पेंशनरों को न्याय मिला है।
पेंशनर्स संस्था के महासचिव वीएस जौली ने कहा कि जो गलती यूपीए सरकार ने छठे वेतनायोग को लागू करते समय जनवरी 2006 से की थी व लाखों पेंशनरों के साथ घोर अन्याय किया था। उसी गलती को स्वीकार करते हुए यूपीए सरकार ने अपने नोटिफिकेशन नंबर 39/08 पीएंड पीडब्लू(ए) 28 जनवरी 2013 के मुताबिक सुधार करते हुए सिर्फ 24 सितंबर 2012 से पेंशन संशोधन का केंद्रीय पेंशनरों व पारिवारिक पेंशनरों को वित्तीय लाभ देने के आदेश जारी किए थे। पेंशनर्स को लंबी लड़ाई के बाद सफलता मिली है। पहले सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल प्रिंसिपल बैंच दिल्ली में 1 नवंबर 2011 को जीत मिली थी। फिर दिल्ली हाईकोर्ट में सफलता पाई। यूपीए सरकार फिर सुप्रीम कोर्ट में चली गई। वहां भी उसे दो बार मुंह की खानी पड़ी। पहले उसकी स्पेशल लीव पिटीशन नंबर 20355/2013 खारिज हो गई। अब रिव्यू पिटीशन नंबर 2492/2013 भी उच्चतम न्यायालय की डबल बेंच ने खारिज कर दी है। यूपीए सरकार को अब जनवरी 2006 से ही पेंशन संशोधन राशि का एरियर देना पड़ेगा। जो उसने चलाकी से केवल 24 सितंबर 2012 से देना स्वीकार किया था।
पेंशनर्स संस्था ने कहा- लंबे संघर्ष के बाद मिली जीत
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केंद्रीय पेंशनर्स को वर्ष 2006 से पहले रिटायर्ड मुलाजिमों को जनवरी 2006 से पैनशन संशोधन का वित्तीय लाभ मिलेगा। पेंशनर्स फ्रेंड ने भारतीय न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुरिंदर सिंह निज्जर व जस्टिस फाकिर मोहम्मद इब्राहिम कलिफुल्ला पर आधारित एक डबल बैंच ने 12 नवंबर 2013 को यूपीए सरकार को झटका देते हुए उसकी रिव्यू पिटीशन सिविल नंबर 2492/2013 व स्पेशल लीव पिटीशन नंबर 20355/2013 को सिरे से ही खारिज कर दिया है। इसका केंद्रीय पेंशनरों को न्याय मिला है।
पेंशनर्स संस्था के महासचिव वीएस जौली ने कहा कि जो गलती यूपीए सरकार ने छठे वेतनायोग को लागू करते समय जनवरी 2006 से की थी व लाखों पेंशनरों के साथ घोर अन्याय किया था। उसी गलती को स्वीकार करते हुए यूपीए सरकार ने अपने नोटिफिकेशन नंबर 39/08 पीएंड पीडब्लू(ए) 28 जनवरी 2013 के मुताबिक सुधार करते हुए सिर्फ 24 सितंबर 2012 से पेंशन संशोधन का केंद्रीय पेंशनरों व पारिवारिक पेंशनरों को वित्तीय लाभ देने के आदेश जारी किए थे। पेंशनर्स को लंबी लड़ाई के बाद सफलता मिली है। पहले सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल प्रिंसिपल बैंच दिल्ली में 1 नवंबर 2011 को जीत मिली थी। फिर दिल्ली हाईकोर्ट में सफलता पाई। यूपीए सरकार फिर सुप्रीम कोर्ट में चली गई। वहां भी उसे दो बार मुंह की खानी पड़ी। पहले उसकी स्पेशल लीव पिटीशन नंबर 20355/2013 खारिज हो गई। अब रिव्यू पिटीशन नंबर 2492/2013 भी उच्चतम न्यायालय की डबल बेंच ने खारिज कर दी है। यूपीए सरकार को अब जनवरी 2006 से ही पेंशन संशोधन राशि का एरियर देना पड़ेगा। जो उसने चलाकी से केवल 24 सितंबर 2012 से देना स्वीकार किया था।